गोरखपुर, जूलाई 25
देवरिया ज़िले के एक आवासीय विद्यालय की दो छात्राओं ने छात्रावास की वार्डन पर आरोप लगाया कि उन्होंने शौचालय साफ़ करने के अपने आदेश को नहीं मानने की वजह से उन्हें वहाँ से निकल दिया जिसके बाद प्राधिकारियों ने इस घटना पर जांच का आदेश दिया।
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय की छात्राएँ, सलीमन और नफरीन, कथित तौर पर विद्यालय के छात्रावास की वार्डन श्रुति मिश्र द्वारा सोमवार शाम को सज़ा के तौर पर घर भेज दी गयीं जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई बंद कर दी।
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) संतोष देव पाण्डेय ने कहा, “जांच का आदेश दिया गया है और उसके आधार पर कार्रवाई की जायेगी।”
7वी कक्षा में पढ़ने वाली सलीमन और 6वी कक्षा में पढ़ने वाली नफरीन रामपुर पुलिस थाना के अंतर्गत सनी पट्टी क्षेत्र के निवासी हैं और उनके पिता मज़दूरी करते हैं।
सलीमन ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया, “मैडम जी हमसे टॉयलेट साफ़ करवाती थी और दूसरे काम भी करवाती थी। जब भी हम पढ़ना चाहते तो खराब भाषा का इस्तेमाल कर हमें अपमानित करती थी। हम तंग आ चुके थे। जब हमने टॉयलेट साफ़ करने से मन कर दिया तब उन्होंने हमें सोमवार शाम को बाहर निकाल दिया और अगले दिन हमने स्कूल छोड़ दिया और पढ़ाई बंद कर दी।
नफरीन ने बताया कि उनकी अध्यापिका स्कूल की दूसरी लड़कियों से खाना बनवाती थी और घर के दूसरे काम करवाती थी।
पत्रकारों से बात करते हुए नफरीन की माँ नूरजहाँ ने कहा, “स्कूल की वार्डन ने दोनों लड़कियों को शाम को निकाल दिया और वो दोनों अगले दिन सुबह अकेली आयीं। उन्हें साथ में किसी को भेज देना चाहिए था। हमारा घर स्कूल से 5 कि.मी. से ज़्यादा दूर है और दोनों लडकियाँ इतनी दूर अकेली आयीं। एक तरफ सरकार हमें कहती है कि हम अपनी बच्चियों को स्कूल भेजें और दूसरी तरफ उनके साथ स्कूल में इतना बुरा व्यवहार होता है।”
बीएसए पाण्डेय से संपर्क करने पर उन्होंने कहा, “हमें इस घटना की जानकारी मिली और जांच शुरू हो चुकी है। वार्डन को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया था और गुनाहगार के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।”