देश के कई राज्यों में शिक्षा का अधिकार कानून का मजाक बनता दिख रहा है। निजी स्कूल इसका खुलेआम उल्लंघन करते दिख रहे हैं वहीं सरकार हाथ में हाथ धरे बैठी हुई है।
निजी स्कूल बच्चों की सूची जारी होने के बाद भी गरीब बच्चों का एडिमशन नहीं लेते हैं। यदि ले भी ले तो फीस को छो़ड़ अन्य सुविधाओं के नाम पर इतनी मोटी रकम की मांग करते हैं कि गरीब अभिभावक देने में असमर्थ होते हैं।
हिंद किसान की एक रिपोर्ट के अनुसार ताज़ा मामला योगी सरकार में फल-फूल रहें निजी स्कूलों का है। कानपूर के निजी स्कूल आरटीई के तहत गरीब कोटे की सूची में नाम आए बच्चों को दाखिला देने के बजाय टालमटोल कर रहे हैं। अभिभावक दो महीने से स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों का भविष्य बर्बाद होने का डर सता रहा है।
गौरतलब है कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए एक-चौथाई सीट आरक्षित होती हैं। दाखिले के आवेदन के बाद इसकी सूची अप्रैल में ही जारी कर दी गई है। लेकिन दो महीने से ऊपर हो गए अभी तक बच्चों का एडमिशन नहीं हो पाया।
स्कूल और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते अभिभावकों की चप्पलें घिस गई हैं। तंग आकर वे कानपूर के बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के सामने ही धरने पर बैठ गए हैं। अभी तक प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से आश्वासन के सिवा कुछ हासिल नहीं हो पाया है।