असम में एनआरसी के मद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पक्ष-विपक्ष इस मसले पर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने में लगे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान ने राज्य में खलबली मचा दी है। बयान के विरोध में लोगों ने ट्रेनों के परिचालन में कुछ समय के लिए बाधा डाला। मातुल संप्रदाय के लोगों ने कई रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन रोक कर आंदोलन किया।
गौरतलब है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने अपने बयान में कहा कि भापजा यदि सत्ता में आती है तो सबसे पहले यहां एनआरसी लागू करेगी और बांग्लादेश से राज्य में आए एक करोड़ बांग्लादेशियों को बाहर निकालेगी।
वहीं प्रदर्शन कर रहें लोगों का आरोप है असम में राजनीतिक रंजिश के तहत 40 लाख लोगों को नागरिकता सूची से बाहर किया गया है। इनका दावा है कि उन लोगों में से अधिकतर लोग मतुआ संप्रदाय के हैं जो लंबे समय से असम में रह रहे थे। जाति और धर्म के आधार पर सरकार ने लोगों को नागरिकता सूची से बाहर किया है।
दैनिक जागरणके एक रिपोर्ट के अनुसार दिलीप घोष ने कहा कि भाजपा ने घोषणा की है कि 30 नवंबर 2015 तक भारत में आए शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी, लेकिन बांग्लादेश से घुसपैठ कर आए लोगों को बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें भी बाहर निकाला जाएगा।
मातुल संप्रदाय के लोग घोष के इस बयान से काफी ख़फ़ा हैं। वे इसे लेकर जगह-जगह आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, मातुल संप्रदाय आज़ादी के बाद बांग्लादेश से खदेड़े गए लोगों का एक समूह है जो मूल रूप से सूफ़ी गायन का काम करता है। इनमें से अधिकतर हिंदू धर्मावलंबी हैं।