जब मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग खुद ही बीमारियों से जूझ रहा है तो सूबे में मरीजों की अच्छे इलाज की आशा कैसे की जा सकती है। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ऊपर से डॉक्टर से नर्सेस तक की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है।
ज़िलों के सरकारी अस्पतालों का हाल तो और भी बुरा है। जांच के लिए लगी मशीनों का गणित फेल है, आलम ये है कि मरीजों की हालत कुछ और होती है और रिपोर्ट कुछ और देती है। रोगियों को गंभीर हालातों में भी जांच के लिए दूसरे जगह ले जाना पड़ता है।
ईनाडु इंडिया के एक रिपोर्ट के अनुसार उमरिया ज़िला में महीनों से डायलिसिस, सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण मशीनें बंद पड़ी हैं जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मशीन नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरन इलाज के लिए बड़े शहरों की तरफ रुख करना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल में ओपीडी सहित आपातकालीन सेवाओं की भी हालत बिगड़ी हुई है।