मॉब लिंचिंग को लेकर देश के गृहमंत्री का बयान अपने आप में फेक न्यूज़ है।

Kashmiris facing harassment
Union Home Minister Rajnath Singh

गुरुवार को संसद के शून्यकाल में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने जब मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों का विषय उठाया, तो उस पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह का बयान अन्य भाजपा नेताओं की तरह घिसा-पिटा था। उन्होंने कहा कि “यह सच्चाई है कि कई प्रदेशों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं। इसमें कई लोगों की जाने भी गई हैं। लेकिन, ऐसी बात नहीं है कि इस तरह की घटनाएं विगत कुछ वर्षों में हुई हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।” राजनाथ सिंह का यह बयान तथ्य से परे है। वो झूठ बोलकर अपने जवाबदेही से बच रहे हैं।

अब ये जगज़ाहिर की मोदी सरकार में भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं काफी बढ़ी है। इस सरकार में मॉबलिंचिंग जैसे खतरनाक शब्द भी सामान्य हो चले हैं। इंडिया स्पेंड जो देश के अलग-अलग घटनाओं पर विश्वसनीय डाटा इकट्ठा करता है। उसके विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के हमलों में 4.5 गुना वृद्धि हुई है और 2017 में इस तरह की घटनाओं से हुई मौत में दो गुना वृद्धि हुई है। 1 जनवरी 2017 से 5 जुलाई 2018 के बीच 69 मामलों में 33 लोगों की मौत हो गई है। यह विचारणीय तथ्य है कि 2017 के पहले 2012 में इस प्रकार की मात्र एक घटना हुई है।

इससे साफ़ पता चलता है कि इस तरह की घटनाओं में पिछले दो वर्षों से काफी तेज़ी आई है। इस मामले में राजनाथ सिंह का बयान फेक न्यूज़ से कम नहीं है।

भीड़ के द्वारा की जा रही हिंसा का एक खास पैटर्न है। तथ्यों की जांच करने पर पता चलता है कि इसके तहत किसी खास जाति, धर्म और समुदाय के लोगों को ही निशाना बनाया जा रहा है। 2010 से 2018 के बीच गौ रक्षा के नाम पर भीड़ के द्वारा 86 घटनाओं को अंजाम दिया गया। इसके तहत 288 लोग शिकार हुए जिसमें 33 की मौत हो गई और 158 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए। इसमें 56 फीसदी मुसलमान और 11 फीसदी दलितों को निशाना बनााया गया। 2018 में ही भीड़ हिंसा की 8 घटनाएं हुईं। इसमें 15 लोग शिकार हुए जिसमें से चार की मौत हो गई। सारे पीड़ित सौ फीसदी मुस्लिम है।

सरकार ये भी जानती है कि भीड़ का भी एक खास विचारधारा है, जो असहमति के स्वर दबाने के लिए टूट पड़ता है। इंडिया स्पेंड के विश्लेषण से पता चलता है कि 2010 से 2018 के बीच भीड़़ हिंसा की 53.4 फीसदी घटनाएं बीजेपी शासित राज्यों में घटी हैं। राजनाथ सिंह अपने बयान में कहते हैं कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। गृहमंत्री रहते उनकी क्या जिम्मेदारी है? क्या वो वाकई देश के गृहमंत्री हैं? अधिकतर राज्यों में बीजेपी की सरकार है, और मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी बीजेपी शासित राज्यों में अधिकतर घट रही हैं। फिर गृहमंत्री का यह बयान जनता को गुमराह करने के सिवा कुछ नहीं है।

मोदी सरकार में सारे केंद्रीय मंत्री अपने बयानों को लेकर सुर्खियों मे हैं। कुछ दिन पहले देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण का भाजपा के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल्स से एक ट्वीट के जरिए बयान आया कि अब से 2019 तक देश में किसी भी घटना के लिए कांग्रेस जिम्मेदार होगी।

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्रियों का इस प्रकार का बचकाना बयान अब आम हो गया है। देश में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार इस प्रकार के बयान देकर अपने प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया हो। यह एक भयावह स्थिति है।

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