शिवराज सिंह चौहान के राज में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल अब किसी से छिपा नहीं है। अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। ग्रामीण क्षेत्र में एंबुलेंस सेवा का लाभ बमुश्किल मिल पाता है। कुछ दिन पहले ही एक प्रसुता को एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण चारपाई से अस्पताल लाना पड़ा। बलरामपुर ज़िले में तो एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलने से संरक्षित कोरवा जनजाति के दो मासूम बच्चे को अपनी ज़िंदगी से हाथ धोना पड़ा।
ताज़ा मामला प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय का है। अस्पताल में वेंटीलेटर खाली नहीं होने की वज़ह से एक लकवाग्रस्त महिला घंटों एंबुलेंस में पड़ी रही। फिर कोई इंतजाम होता नहीं देख उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस 108 नं. एंबुलेंस से उस महिला को अस्पताल लाया गया उसमें ऑक्सीजन का सिलेंडर ही नहीं था।
ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ज्योति नामक एक महिला को चोइथाराम अस्पताल से शासकीय एमवाय अस्पताल में रेफर किया गया था जहां मरीज को लेने आई 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन का सिलेंडर नहीं था। चोइथाराम अस्पताल से ही एक सिलेंडर की व्यवस्था की गई फिर इसे एमवाय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि वहां वेंटीलेटर खाली ही नहीं है। इस परिस्थिति में परिजन काफी परेशान हो गए। घंटों बाद कोई इंतजाम नहीं होता देख परिजनों ने निजी अस्पताल में ही महिला को भर्ति करवा दिया।
गौर करने की बात यह है कि एमवाय अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।