शिवराज सरकार में खोले गए देश के पहले गो-अभ्यारण्य में गायों की एंट्री पर ही रोक लगा दी गई है। अभी अभ्यारण्य की क्षमता के अनुसार गायों को रखा भी नहीं गया है और पानी एवं चारे की कमी का हवाला देकर नई एन्ट्री पर रोक लगा दी गई है। यह रोक पिछले छह महीनों से जारी है।
गौरतलब है कि गायों को संरक्षण और उन्हें रहने के लिए घर देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने 2017 में कामधेनु गो-अभ्यारण अनुसंधान और उत्पादन केंद्र की स्थापना की थी। लेकिन उद्घाटन के पांच महीने बाद ही फरवरी 2018 में नए गायों के प्रवेश पर रोक लगा दी। इस अभ्यारण्य की क्षमता 6000 गायों के रखने की है लेकिन मौजूदा समय में इसमें 4,120 गाय ही हैं।
ईनाडु की एक रिपोर्ट के अनुसार 472 हेक्टेयर में फैले इस अभ्यारण्य में अधिकारियों के अनुसार पानी और हरे चारे की कमी हो गई है जिसके चलते ही छह महीने से नई गायों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा वहां कुएं खोदने शुरू कर दिए गए हैं। गायों को चरने के लिए अलग से चारागाह बनाने का काम भी चल रहा है। सारे काम हो जाने के बाद हम नए गायों को एंट्री देंगे।
गौरतलब है कि इस अभ्यारण्य में अवारा और लोगों द्वारा परित्याग किए गए गायों को रखा जाता है। इन गायों के गोबर और गौमूत्र से दवाइयां और कीटनाशक बनाने की व्यवस्था है। राज्य सरकार गायों के संरक्षण के लिए हर महीने 30 लाख रुपए खर्च कर रही है।