नवजातों के बेहतर इलाज के लिए यूनिसेफ की सहयोगिता में ज़िला अस्पतालों में स्थापित की गई एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) में अनियमितता के चलते यही इकाइयां अब उन्हीं नवजात शिशुओं के मौत का सबब बन गई हैं। मध्य प्रदेश सरकार इन इकाइयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करवाने में नाकाम साबित हो रही है जिसकी वजह से अब तक रायसेन में 7 और गुना में 29 शिशुओं की मौत हो चुकी है।
जागरण में प्रकाशित प्रमोद त्रिवेदी की एक रिपोर्ट के अनुसार रायसेन एसएनसीयू में पदस्थ एकमात्र विशेषज्ञ डॉ. आलोक सिंह राय का तबादला सीएमएचओ द्वारा बेगमगंज सिविल अस्पताल कर दिया गया जिसकी वजह से इकाई में उपचार के लिए उपस्थित नवजात शिशु तीन दिनों तक वहाँ के नर्सों के भरोसे ही रह गए। परिणामस्वरूप एक शिशु कि मौत हो गयी जिसके बाद 6 बच्चों को भोपाल रेफर कर दिया गया। इनमें से भी एक शिशु ने भोपाल के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह से बात करने पर विभाग ने फिर से कुछ फेरबदल और तबादले किए लेकिन उसका कोई असर नहीं दिखा क्योंकि अब तक रायसेन में डॉक्टर अब तक किसी डॉक्टर ने कार्यभार नहीं संभाला है। इसके अलावा अजीब बात ये भी है कि गुना से ही तबादला कर विभाग ने डॉक्टर को रायसेन भेजा लेकिन अब हाल ये है कि डॉक्टर साहब न रायसेन पहुंचे और ऊपर से गुना में भी जाना बंद कर दिया जबकि गुना में पदस्थ तीन अन्य डॉक्टर अवकाश या प्रशिक्षण में व्यस्त रहे। इन्हीं सब अनियमितता के कारण गुना की व्यवस्था बिगड़ गई और वहाँ तीन दिन में ही 6 शिशुओं की मौत हो गई।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री शरद जैन ने कहा कि मामले की जांच कराई जायेगी। यदि विशेषज्ञ डॉक्टर कम हैं तो तुरंत नियुक्त किये जायेंगे और जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।