वर्त्तमान समय में मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग की हालत ये हो गयी है कि एक तरफ बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें नहीं मिल रही हैं तो दूसरी ही तरफ खाने के लिए अच्छा भोजन भी नहीं मिल रहा। यहाँ स्कूलों में मिड-डे मील में परोसे जाने वाले भोजन में लगातार शिकायतें आ रही हैं।
खबरों के अनुसार कुछ दिन पहले ही प्रदेश के दमोह ज़िले में ज़हरीला मिड-डे मील खाने से पचास बच्चे फूड पॉयजनिंग के शिकार हो गए थे। यानी कि जो भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दिया जा रहा है वो बच्चों की जान पर आफत बनता दिखाई दे रहा है।
ताज़ा मामला रीवा ज़िले का है। यहां बच्चों को मीड-डे मील में दूषित खाना परोसा जा रहा है। इस मामले में ज़िले के कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर छात्रों के परिजनों ने क्लेक्टर से गड़बड़ी करने वाले समूह पर कार्रवाई करने की मांग की है।
ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार क्लेक्टर को इस सिलसिले में एक ज्ञापन सौंपा गया है जिसमें बताया गया है कि शासकीय प्राथमिक शाला, डांडी टोला कपसा विद्यालय के मीड-डे मील में बच्चों को सड़ी दाल खिलाई जा रही है जिससे वे बीमार हो रहे हैं।
इस ज्ञापन में कलेक्टर से मांग की गई है कि ज़िले में जो भी समूह मिड-डे मील बनाने का काम कर रहे हैं उनकी सतत निगरानी की जाए और जो भी इस घटना में दोषी पाए जाएँ उन्हें निरस्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।