शिवराज सरकार की तरह रमन सरकार में भी मनरेगा के तहत फर्ज़ीवाड़े का मामला सामने आया है। हालांकि छत्तीसगढ़ में यह मामला काफी बड़ा है, इसमें सोशल ऑडिट के ज़रिए 300 पंचायतों में कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपए गबन की बात सामने आई है।
ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले में जैविक खाद के लिए बनाए जा रहे नाडेफ टंकी के लिए पैसे तो जारी किए गए हैं, लेकिन नाफेड टंकी का निर्माण नहीं किया गया। ठेकेदार और विभाग के अधिकारी करोड़ों रुपए हज़म कर गए।
गौरतलब है कि ज़िले में मनरेगा को लेकर सोशल ऑडिट कराया गया था। बालोद के 421 पंचायतों में से 300 पंचायतों में मनरेगा के तहत हुए कामों में फ़र्ज़ी मस्टर रोल बनाकर इस करोड़ों के फ़र्ज़ीवाड़े को अंजाम दिया गया है।
फ़र्ज़ीवाड़े का खुलासा होने के बाद भी विभाग के अधिकारी द्वारा पैसे की रिकवरी नहीं की जा रही है। ज़िला ऑडिट अधिकारी का कहना है कि 2017-18 में मनरेगा के तहत करीब एक करोड़ रुपए से ज़्यादा फ़र्ज़ीवाड़े का मामला सामने आया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं ईनाडु के अनुसार कृषि विभाग का कहना है कि जैविक कृषि के लिए मनरेगा के तहत डौंडी ब्लॉक में 2015-16 में 981 नाडेफ टंकी की स्वीकृति मिली थी जिसमें 581 का अब तक निर्माण हो चुका है।