देश के गौरव की बात करने वाली मोदी सरकार पर तीखा आरोप लगते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में संसदीय प्राक्कलन समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा कि पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने देश की रक्षा तैयारियों को 1962 के स्तर पर ला गिराया है जब भारत को चीन के साथ युद्ध में बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ा था।
अपनी 29वी रिपोर्ट में सैन्य बालों की रक्षा तैयारी – रक्षा उत्पादन एवं खरीद की प्राक्कलन समिति ने कहा कि मोदी सरकार भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी कर रही है और इसके अंजाम आगे चल कर बहुत बुरे हो सकते हैं।
तीन रक्षा प्रमुखों एवं रक्षा मंत्रालय के प्रमुख अधिकारियों की जांच करने वाली इस समिति ने कहा, “आज 1.6% पर भारत के रक्षा बजट का जीडीपी के साथ अनुपात 1962 से पहले के स्तर पर पहुँच चुका है। इसके अंजाम बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हो सकते हैं।”
मोदी सरकार के रवैय्ये पर तीखा प्रहार करते हुए समिति ने आगे कहा, “वर्त्तमान के भू-राजनैतिक परिदृश्य में, भारत जैसा इतना बड़ा देश आत्मसंतुष्ट नहीं हो सकता है वह भी तब जब सवाल हिन्द महासागर पर अपना प्रभुत्व बनाये रखते हुए दो मोर्चों पर युद्ध के लिए रक्षा तैयारियों का है। इसलिए समिति देश की सुरक्षा एवं बचाव की चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा तैयारियों की वर्त्तमान की ज़रूरतों और उनके विस्तार एवं आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन के आवंटन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर ज़ोर देती है।”
समिति ने अपनी अवलोकन में यह भी स्पष्ट किया कि साल 2012-13 एवं 2013-14 के मुकाबले साल 2017-18 एवं 2018-19 में रक्षा तैयारियों के लिए होने वाले पूंजीगत व्यय में करीबन 5-6 प्रतिशत की गिरावट आई है। गौरतलब है कि बजट आवंटन सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है जो कि एलटीआईपीपी के तहत तय ज़रूरतों के हिसाब से नहीं होता है।
क्या यह कोई अचरज की बात है कि मोदी-शाह बाहरी दुश्मनों से लड़ने में ग़ैरदिलचस्प हैं तब जब उन पर एक भारतीय को दुसरे से लड़वाने का जूनून सवार है?
क्या यह कोई अचरज की बात है कि वह पार्टी जो आम भारतीयों को ‘घुसपैठिया’ कह रही है, वह असली घुसपैठियों से भारत को बचाने के मामले में आपराधिक असावधानी बरत रही है?
शर्म आनी चाहिए उन्हें जो भारत के साथ ऐसा कर रहे हैं, और शर्म आनी चाहिए हमें जो यह सब होते हुए देख रहे हैं।
इतना तो तय है कि भारत एक बहुत बड़े संकट की तरफ बढ़ रहा है और एक बार मोदी 2019 में सत्ता से बाहर हो गए तो अगली सरकार को समस्याओं का अम्बार परोसा हुआ मिलेगा। यह बिलकुल स्पष्ट होना चाहिए कि एक ऐसे प्रधानमंत्री जिनकी उपलब्धि सिर्फ नारे ही हैं, वह भारत को बनायेंगे नहीं, भारत को तोड़ेंगे।
मोदी जी, आपको यह दावा करना ख़ूब भाता है कि आप 70 सालों बाद “पहले” प्रधानमंत्री हैं। बिलकुल सच है, लेकिन आपके साथ एक और चीज़ हुई जो इससे पहले इस देश के किसी प्रधानमंत्री के साथ नहीं हुई थी। आप स्वतन्त्र भारत के वो पहले प्रधानमंत्री हैं जिस पर एक संसदीय समिति ने “हमारे देश की सुरक्षा एवं बचाव के साथ समझौता करने” का और भारत को एक ऐसी परिस्थिति में डाल देने का आरोप लगाया है जिसके अंजाम आगे आने वाले दिनों में बहुत चिंताजनक हो सकते हैं।
वाह मोदी जी, वाह!