गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि सरकारी पद से हटने के बाद नेताओं को सरकारी बंगलों में रहने का अधिकार नहीं है। इस आदेश के बाद मध्यप्रदेश में बंगले खाली करवा दिए गए थे।
एएनआई के एक ट्वीट में बताया गया कि एक बार फिर शिवराज सरकार ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर उमा भारती, कैलाश चंद्र जोशी और बाबूलाल गौर को बंगले वापस कर दिए। इस विशेषाधिकार के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों में से दिग्विजय सिंह को छोड़कर बाकी तीनों को प्रदेश के ‘गणमान्य नागरिक’ का दर्जा देते हुए सरकारी बंगले वापस आवंटित कर दिए गए हैं।
Madhya Pradesh CM Shivraj Singh Chouhan allows 3 former CMs-Uma Bharti, Kailash Chandra Joshi & Babulal Gaur, to retain govt bungalows using his ‘discretionary powers’, after former CMs including Digvijaya Singh were asked to vacate their bungalows in compliance with an SC ruling pic.twitter.com/SSt9UQnlOh
— ANI (@ANI) July 28, 2018
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस विशेषाधिकार के तहत पूर्वमुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को इसका लाभ नहीं दिया गया है।
टाइम्स नाउ के अनुसार पार्टी के नेताओं की सलाह पर मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से दोबारा बंगले पाने के लिए आवेदन मंगाए। इसमें नेताओं ने बंगला देने की गुजारिश करते हुए उसके लिए कारण भी दिए। कैलाश जोशी ने यह कहते हुए आवेदन किया कि समाजसेवी होने के नाते उन्हें बंगला मिलना चाहिए। बाबूलाल गौर ने लंबे समय से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री होने का हवाला दिया। जबकि उमा भारती ने कहा कि वह केंद्रीय मंत्री हैं और उन्हें कई बार भोपाल आना-जाना होता है इसलिए बंगला दिया जाए।
हालांकि इन नेताओं को बंगले का किराया देना होगा। लेकिन सरकार ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर भाजपा से ही आने वाले तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को ही इसका लाभ दिया और दिग्विजय सिंह को इस लाभ से दूर रखा गया। सरकार का यह फैसला सवालों के घेरे में है।