मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री साहब अपने राज्य के विकास का कितना भी दावा करते हों पर उनके शासन व्यवस्था में शिक्षा का बुरा हाल है।’सीहोर’ जो कि शिवराज सिंह चौहान का गृह ज़िला हैं वहाँ बच्चे तो स्कूल पहुंच जाते हैं पर शिक्षक दूर-दूर तक नजर नहीं आते। मुखिया के गृह ज़िले में ही जब शिक्षा का ये हाल है तो हम अनदाज़ा लगा सकते हैं कि पूरे प्रदेश का क्या हाल होगा।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये मामला लाडकुई स्कूल की माध्यमिक शाला का है जो आईखेड़ा स्कूल के अतिथि शिक्षक के बल पर चल रहा था। प्रशासन द्वारा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किए जाने से यहां एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है।
वहीं स्थाई शिक्षक भी समय पर शाला में नहीं पहुंच रहे हैं। स्कूल में ताला लगा रहता है और छात्र रोज़ आकर शिक्षक का इंतजार कर घर लौट जाते हैं।
सूबे के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था का सबसे बुरा हाल है। बहुत सारे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। पढ़ने की जगह वे अलग-अलग घरेलू काम करते नज़र आते हैं। जब बच्चे स्कूल जाते हैं तो शिक्षक गायब रहते हैं। शिक्षकों के भारी कमी से कई स्कूलों में ताले जड़े हैं।